केंद्र–राज्य विधायी संबंध (अनुच्छेद 245–255)


संवैधानिक आधार

संविधान के भाग XI के अंतर्गत अनुच्छेद 245 से 255 केंद्र और राज्यों के बीच विधायी संबंधों से संबंधित हैं। ये प्रावधान यह निर्धारित करते हैं कि कौन कानून बनाएगा, किन विषयों पर और किन परिस्थितियों में

1. विधायी शक्तियों का क्षेत्रीय विस्तार

  • संसद पूरे भारत या उसके किसी भाग के लिए कानून बना सकती है, यहाँ तक कि अतिरिक्त क्षेत्रीय (extraterritorial) कानून भी।
  • राज्य विधानमंडल केवल अपने क्षेत्र के लिए कानून बना सकते हैं, सिवाय क्षेत्रीय संबंध सिद्धांत (Territorial Nexus) के मामलों में।

अनुसूचित क्षेत्रों, जनजातीय क्षेत्रों और कुछ केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विशेष प्रावधान मौजूद हैं।

2. विधायी विषयों का वितरण

सातवीं अनुसूची के अंतर्गत विषयों को तीन सूचियों में बाँटा गया है:

  • संघ सूची – संसद का विशेष अधिकार
  • राज्य सूची – राज्यों का विशेष अधिकार (अपवादों सहित)
  • समवर्ती सूची – केंद्र और राज्य दोनों

42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा शिक्षा और वन जैसे विषय राज्य सूची से समवर्ती सूची में लाए गए।

🔹 Exam Tip:
हमेशा उल्लेख करें कि अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास होती हैं

3. राज्य सूची पर संसदीय विधि-निर्माण

पाँच असाधारण परिस्थितियों में संसद राज्य सूची पर कानून बना सकती है:

  1. राज्यसभा का प्रस्ताव
  2. राष्ट्रीय आपातकाल
  3. राज्यों का अनुरोध
  4. अंतरराष्ट्रीय संधियों का क्रियान्वयन
  5. राष्ट्रपति शासन

4. राज्य विधान पर केंद्र का नियंत्रण

  • राज्यपाल द्वारा विधेयकों को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना
  • कुछ विधेयकों के लिए पूर्व राष्ट्रपति स्वीकृति
  • वित्तीय आपातकाल के दौरान नियंत्रण

निष्कर्ष

विधायी संबंध राष्ट्रीय एकरूपता सुनिश्चित करते हैं, साथ ही राज्यों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कानून बनाने की गुंजाइश भी देते हैं।

PREVIOUS YEAR QUESTIONS

सातवीं अनुसूची के माध्यम से विधायी शक्तियों के वितरण का विश्लेषण कीजिए। (MPPSC)

संसद किन परिस्थितियों में राज्य सूची पर कानून बना सकती है? (CGPSC)

समवर्ती सूची में केंद्र की प्रधानता का परीक्षण कीजिए। (RPSC)

भारतीय संविधान में विधायी संघवाद की प्रकृति स्पष्ट कीजिए। (UPPSC)


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