भारत आज भी एक cash-based economy है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे व्यापारियों और असंगठित क्षेत्र में। लोग नकद लेन–देन इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि यह आसान, तेज, सुविधाजनक होता है और इसमें इंटरनेट/बैंकिंग सुविधा की जरूरत नहीं होती। साथ ही कम साक्षरता और डिजिटल जागरूकता की कमी वाले क्षेत्रों में नकद भुगतान सबसे सामान्य तरीका है।
लेकिन नकद पर अत्यधिक निर्भरता के कारण अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा सरकारी रिकॉर्ड (official records) से बाहर रह जाता है। इससे informal economy मजबूत होती है, कर (tax) संग्रह कम होता है तथा भ्रष्टाचार और काले धन को बढ़ावा मिलता है।
Cash transactions = कम ट्रेसबिलिटी (traceability) = informal economy अधिक
अर्थ एवं मूल अवधारणा (Meaning & Basic Concepts)
नकद लेन–देन (Cash Transaction) क्या है?
जब कोई भुगतान नोट/सिक्कों के माध्यम से किया जाता है, और उसमें बैंक/डिजिटल माध्यम शामिल नहीं होता, उसे नकद लेन–देन कहते हैं।
उदाहरण: कैश में खरीद–फरोख्त, मजदूरी का भुगतान, नकद किराया, नकद कमीशन आदि।
अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (Informal Economy) क्या है?
अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में वे गतिविधियाँ आती हैं जो सरकारी नियमों/रजिस्ट्रेशन/कर व्यवस्था के बाहर होती हैं।
इसमें सामान्यतः शामिल होते हैं:
- Unregistered enterprises (अपंजीकृत व्यवसाय)
- बिल/इनवॉइस का अभाव
- GST registration नहीं
- सामाजिक सुरक्षा नहीं (PF/ESI/Pension नहीं)
- Cash wage labour (नकद मजदूरी)
उदाहरण:
स्ट्रीट वेंडर, छोटा किराना, रेहड़ी–पटरी, दैनिक मजदूर, छोटे ठेकेदार, होम-बेस्ड यूनिट्स, घरेलू कामगार आदि।
Informal Economy में Cash Transactions क्यों अधिक हैं? (Causes)
कम साक्षरता और डिजिटल जागरूकता की कमी
कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए कैश सबसे सरल तरीका होता है। डिजिटल भुगतान में तकनीकी समझ चाहिए।
Digital Literacy, Financial Awareness
कमजोर बैंकिंग ढाँचा (Weak Banking Infrastructure)
ग्रामीण/अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में:
- बैंक शाखाएँ कम
- ATM पर निर्भरता
- इंटरनेट नेटवर्क कमजोर
भरोसा (Trust Factor)
कई लोग मानते हैं कि कैश “असल पैसा” है और इसी में नियंत्रण रहता है।
कर व नियमों से बचने की प्रवृत्ति
कैश से लेन–देन करने पर आसानी से:
- GST से बचाव
- Income tax से बचाव
- Labour laws से बचाव
- compliance paperwork से बचाव
डिजिटल भुगतान की लागत (Transaction Cost)
छोटे व्यापारियों को:
- POS मशीन की लागत
- MDR charges
- बैंक कटौती
का डर रहता है, इसलिए वे कैश पसंद करते हैं।
Cash Transactions का Informal Economy पर प्रत्यक्ष प्रभाव (Direct Impact)
अनौपचारिक व्यवसायों को मजबूती
कैश ट्रांजैक्शन में डिजिटल ट्रेल नहीं होता, इसलिए:
- बिना रजिस्ट्रेशन व्यापार
- बिल/इनवॉइस की जरूरत नहीं
- बिक्री को कम दिखाना (underreporting) आसान
परिणाम: informal economy का विस्तार होता है।
कर चोरी बढ़ती है (Tax Evasion & Revenue Loss)
कैश से:
- बिक्री छिपाई जाती है
- नकली खाते बन सकते हैं
- पूरी cash-only डीलिंग हो जाती है
जिससे घटता है:
- GST revenue
- Income tax collection
- नगर निकाय/स्थानीय कर
Cash-based informal economy भारत के low tax-to-GDP ratio का एक प्रमुख कारण है।
काले धन को बढ़ावा (Black Money Generation)
अधिक कैश होने पर बढ़ते हैं:
- Black income
- Benami transactions
- Cash hoarding
- Bribery ecosystem
Black Money, Parallel Economy, Shadow Economy
भ्रष्टाचार आसान हो जाता है
कैश का इस्तेमाल होता है:
- रिश्वत में
- कमीशन में
- अवैध लेन–देन में
इसीलिए कहा जाता है:
Cash becomes “fuel” for corruption.
आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता खराब होती है (Poor Economic Data)
जब लेन–देन रिकॉर्ड नहीं होता:
- GDP estimation कठिन
- employment data अविश्वसनीय
- policy planning प्रभावित
इस कारण सरकार को सही नीतियाँ बनाना मुश्किल होता है।
असंगठित श्रमिक अधिक असुरक्षित (Workers Remain Vulnerable)
Cash wage economy में:
- मजदूरी नकद होती है (no payslip)
- PF/ESI नहीं
- pension नहीं
- maternity benefits नहीं
- job insecurity
इसलिए cash transactions formalisation में बाधा बनते हैं।
उत्पादकता कम रहती है (Low Productivity)
Cash आधारित informal business में:
- formal credit नहीं मिलता
- technology adoption कम
- scale expansion सीमित
क्योंकि बैंक proof मांगते हैं (income proof / transaction records), जो इनके पास नहीं होता।
आधुनिक क्रेडिट सिस्टम में प्रवेश बाधित (Barrier to Modern Credit Ecosystem)
डिजिटल ट्रेल नहीं होने पर:
- credit score नहीं
- formal loan नहीं
- moneylenders पर निर्भरता
परिणाम: informal economy poverty trap में फँसी रहती है।
सेक्टर-वाइज प्रभाव (Sector-wise Impact)
ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy)
कैश ज्यादा होता है:
- कृषि मजदूरी
- दूध/सब्जी बिक्री
- मंडी व्यापार
MSMEs एवं छोटे व्यापारी
- बिलिंग avoided
- partial sales shown
निर्माण क्षेत्र (Construction Sector)
- daily wage labour
- contractor chain → mostly cash
परिवहन (Transport Sector)
- cash payments
- informal drivers
- underbilling
Cash vs Cashless Economy
Cashless Economy के फायदे
- भ्रष्टाचार/black money कम
- tax compliance बढ़ती
- financial inclusion मजबूत
- subsidy targeting बेहतर
- business formalisation आसान
Cashless Economy की सीमाएँ
- digital fraud का खतरा
- technical failures / server issues
- bank dependency
- privacy concerns
- merchant/consumer transaction cost
भारत तुरंत पूरी तरह cashless नहीं बन सकता, लेकिन less-cash economy जरूर बन सकता है।
Cash Dependence कम करने के सरकारी प्रयास (Government Measures)
डिजिटल भुगतान (Digital Payments)
- UPI revolution
- RuPay cards
- BHIM App
- QR payments
Financial Inclusion
- Jan Dhan Yojana
- banking network expansion
GST
GST invoice culture बनाता है → formalisation बढ़ता है।
नोटबंदी (Demonetisation, 2016)
लक्ष्य: black money व cash economy पर रोक
प्रभाव:
- short-term disruption (मजदूरी, व्यापार)
- लेकिन digital payments को push मिला
आगे की राह (Way Forward)
भारत को चाहिए:
- ग्रामीण क्षेत्र में affordable internet + stable network
- digital literacy programs
- MDR/transaction charges कम
- मजबूत cybersecurity ecosystem
- छोटे व्यापारियों को QR/UPI adoption में support
- digital invoice के लिए incentives
- छोटे व्यापारियों को formal credit access
निष्कर्ष (Conclusion)
Cash transactions कम करना formalisation of economy, tax compliance, government revenue, और workers की social security के लिए जरूरी है। नकद पर निर्भरता घटाकर ही भारत एक मजबूत और पारदर्शी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ सकता है।
PREVIOUS YEAR QUESTIONS
अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर नकद लेन–देन के बहुआयामी प्रभाव बताइए — इसके लाभ व सीमाएँ। (MPPSC)
नोटबंदी का असंगठित क्षेत्र पर अल्पकालिक प्रभाव स्पष्ट कीजिए। (CGPSC)
डिजिटल अर्थव्यवस्था में असंगठित श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियाँ बताइए। (RPSC)
रोजगार को बनाए रखते हुए informal sector के formalisation हेतु उपाय सुझाइए। (UPPSC)
कैश-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वित्तीय समावेशन की भूमिका स्पष्ट कीजिए। (MPPSC)

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