मौलिक अधिकार


मौलिक अधिकार भारतीय संविधान के भाग III (अनुच्छेद 12 से 35) में सूचीबद्ध वे अधिकार हैं, जिन्हें देश की शासन व्यवस्था का आधार और नागरिकों के नैतिक, भौतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए अपरिहार्य माना गया है। इन्हें भाग III में भारत के मैग्‍ना कार्टा के रूप में बताया गया है। ‘मौलिक’ शब्द यह दर्शाता है कि ये अधिकार इतने महत्वपूर्ण हैं कि संविधान ने इन्हें विशेष सुरक्षा प्रदान की है और सरकार भी इनका उल्लंघन नहीं कर सकती। अगर किसी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो हर किसी को सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का अधिकार है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता विवरण
न्यायोचित (Justiciable)यदि सरकार या किसी अन्य द्वारा इन अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है, तो नागरिक उच्च न्यायालय (High Courts – Article 226) या सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court – Article 32) में सीधे अपील कर सकता है।
संशोधनीय प्रकृतिये अपरिवर्तनीय या स्थायी नहीं हैं। संसद के पास संविधान के किसी भी भाग, यहाँ तक कि मौलिक अधिकारों में भी संशोधन (Article 368) करने की शक्ति है, बशर्ते वह संविधान के मूल ढाँचे (Basic Structure) का उल्लंघन न करे।
उचित प्रतिबंधिताये अधिकार पूर्ण नहीं हैं; इन पर ‘उचित प्रतिबंध’ (Reasonable Restrictions) लगाए जा सकते हैं, जिसका निर्धारण अंततः न्यायपालिका करती है।
व्यापक और विस्तृतभाग III में सूचीबद्ध अधिकार बहुत विस्तृत हैं। प्रत्येक अनुच्छेद को उसके दायरे और सीमाओं (Scope and Limitations) के साथ वर्णित किया गया है।
कानूनी श्रेष्ठतामौलिक अधिकार साधारण कानूनों से श्रेष्ठ हैं और न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के सिद्धांत द्वारा संरक्षित हैं।
संविधान का अभिन्न अंगमौलिक अधिकार संविधान का एक अनिवार्य हिस्सा हैं और इन्हें साधारण कानून (Ordinary Legislation) द्वारा समाप्त नहीं किया जा सकता।

मौलिक अधिकारों का वर्गीकरण

1. समता का अधिकार (Right to Equality – अनुच्छेद 14-18)

अनुच्‍छेदप्रावधानमहत्‍च
अनुच्छेद 14विधि के समक्ष समता (UK कॉनसेप्‍ट) और कानूनों का समान संरक्षण (US कॉनसेप्‍ट)। (कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।)यह “उचित वर्गीकरण” की अनुमति देता है लेकिन “वर्ग विधान” पर रोक लगाता है। यही समान व्यवहार का मूल सिद्धांत है।
अनुच्छेद 15 और 16धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक (15) और लोक नियोजन में अवसर की समानता (16)यह सिर्फ़ औपचारिक समानता नहीं, बल्कि वास्तविक समानता सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षात्मक भेदभाव (आरक्षण) का प्रावधान करता है।
अनुच्छेद 17अस्पृश्यता का अंतयह सामाजिक न्याय हासिल करने और ऐतिहासिक ऊँच-नीच को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली साधन है।

2. स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom – अनुच्छेद 19-22)

अनुच्‍छेदप्रावधानमहत्‍च
अनुच्छेद 19छह प्रकार की स्वतंत्रताएँ: भाषण और अभिव्यक्ति; शांतिपूर्वक एवं निरायुध सम्मेलन; संघ या यूनियन बनाना; भारत के राज्य क्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण; भारत के किसी भी भाग में निवास करना; कोई भी पेशा, व्यवसाय या व्यापार करना।ये लोकतांत्रिक कामकाज की बुनियाद हैं और राज्य द्वारा तय की गई पाबंदियों के अधीन हैं।
अनुच्छेद 21प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षणसर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसका व्यापक विस्तार किया गया; गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार, निजता का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार आदि शामिल किये गए।
अनुच्छेद 21Aशिक्षा का अधिकार राज्य 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेगा – 86वाँ संशोधन, 2002
अनुच्छेद 20 और 22अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण (20); कुछ मामलों में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण (22)यह कानून के शासन और उचित कानूनी प्रक्रिया को सुनिश्चित करता है, जिसमें गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी पाने का अधिकार शामिल है और गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।

3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right against Exploitation – अनुच्छेद 23-24)

अनुच्‍छेदप्रावधान
अनुच्छेद 23मानव दुर्व्यापार (Trafficking) और बलात् श्रम (Forced Labour/Begar) का निषेध।
अनुच्छेद 24बाल श्रम का निषेध – 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों या अन्य खतरनाक कार्यों में नियोजित नहीं किया जा सकता।

4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion – अनुच्छेद 25-28)

अनुच्‍छेदप्रावधान
अनुच्छेद 25
अंतःकरण की और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता। यह भारत के सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता (सभी धर्मों के लिए समान सम्मान और सुरक्षा) के सिद्धांत को स्थापित करता है।
अनुच्छेद 26धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता।

5. सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार (Cultural and Educational Rights – अनुच्छेद 29-30)

अनुच्‍छेदप्रावधान
अनुच्छेद 29अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण (भाषा, लिपि और संस्कृति बनाए रखने का अधिकार)।
अनुच्छेद 30अल्पसंख्यकों (धार्मिक या भाषाई) को शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार।

6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies – अनुच्छेद 32)

  • इसे डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने ‘संविधान की आत्मा और हृदय’ कहा था।
  • यह स्वयं में एक मौलिक अधिकार है जो अन्य मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता है।
  • यह नागरिकों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय में जाने का अधिकार देता है, जिसके तहत न्यायालय बन्दी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), उत्प्रेषण (Certiorari), और अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto) जैसे रिट (Writs) जारी कर सकता है।
PREVIOUS YEAR QUESTIONS

संपत्ति के अधिकार की वर्तमान स्थिति क्या है? (CGPSC 2024)

धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार पर किन्हीं तीन ‘उचित प्रतिबंधों’ पर चर्चा करें। (RPSC 2023)

भारतीय संविधान के तहत ‘सुरक्षात्मक भेदभाव’ की अवधारणा को समझाएँ। (RPSC 2022)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार के विस्तार का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। (UPPSC 2022)

मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के बीच अंतर समझाएँ। (MPPSC 2022)

भारत के संविधान के अनुसार कानून के समक्ष समानता की अवधारणा पर चर्चा करें। (MPPSC 2022)


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